Saturday, March 2, 2024

Tesla नहीं लॉन्च करेगी भारत में इलेक्ट्रिक कार, क्या नहीं बन पाई सरकार से बात?

बता दें, Tesla भारत में अपनी कारों को लॉन्च करने के लिए आयात करों में कमी की मांग कर रही थी, और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ एक वर्ष से अधिक समय तक चली बातचीत में कोई खास परिणाम नहीं निकला। Tesla ने संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के उत्पादन केंद्रों से आयातित इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को कम टैरिफ पर बेचकर पहली मांग की थी।

भारत में Tesla के वाहनों की लांचिंग पर लंबे समय से चर्चा चल रही है, और अब खबर है, कि Tesla ने भारत में इलेक्ट्रिक कारों को बेचने की योजना पर रोक लगा दी है। न सिर्फ राक लगाई बल्कि शोरूम की जगह की तलाश भी छोड़ दी है। बता दें, Tesla भारत में अपनी कारों को लॉन्च करने के लिए आयात करों में कमी की मांग कर रही थी, और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ एक वर्ष से अधिक समय तक चली बातचीत में कोई खास परिणाम नहीं निकला। Tesla ने संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के उत्पादन केंद्रों से आयातित इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को कम टैरिफ पर बेचकर पहली मांग की थी। लेकिन भारत सरकार टैरिफ को कम करने से पहले Tesla को स्थानीय स्तर पर देश में विनिर्माण के लिए जोर दे रही है। खैर, अब इन सब पर बातों पर विराम लग गया है, और Tesla ने भारत से किनारा कर लिया है।

सरकार ने लगाया Tesla पर विराम

सूत्रों की मानें तो प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने रियायत की पेशकश नहीं की, तो Tesla ने भारत में कारों के आयात की योजना को रोक दिया। Tesla अपने पहली कार को इस साल के अंत में लॉन्च करने की योजना बना रही थी, और इस दिशा में मॉडल 3 की टेस्टिंग भी जारी थी। वहीं अमेरिकी दिग्गज ने महीनों से नई दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के प्रमुख भारतीय शहरों में शोरूम और सर्विस सेंटर खोलने के लिए रियल एस्टेट विकल्पों के लिए स्काउट किया था, लेकिन यह योजना भी अब होल्ड पर है। यानी अब Tesla की भारत में कारों को देखने का सपना लंबे समय के लिए ठंडे बस्ते में चला गया है। भारत से लेकर इंडोनेशिया तक एलन मस्क Tesla की राह खोज रहे हैं। Tesla ने भारत में मौजूद अपनी कुछ छोटी टीम को अन्य बाजारों के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। बता दें, हाल ही में जनवरी में अेस्ल के सीईओ एलन मस्क ने कहा था कि Tesla भारत में बिक्री के संबंध में “अभी भी सरकार के साथ बहुत सारी चुनौतियों का सामना कर रही है”। अब मस्क के इस फैसले से लगता है, कि सरकार और Tesla की बात नहीं बन पाई और मस्क को अन्य देश जहां आयातित कर कम है, भा गए हैं।

भारत में लगता है ज्यादा टैक्स

वहीं मोदी ने “मेक इन इंडिया” अभियान के साथ वाहन निर्माताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पहले ही मस्क को कह चुके हैं, कि चीन से भारत में कारों का आयात करना “अच्छा प्रस्ताव” नहीं होगा। हालांकि, Tesla कर के मामले में पैरवी करने वाली अकेली कंपनी नहीं है, ऑडी ने भर 2021 में इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात शुल्क घटाने का आह्वान किया है। ध्यान दें, कि भारत 40,000 डॉलर या उससे कम कीमत वाले ईवीएस पर 60% आयात शुल्क लेता है, और इस 60% आयात शुल्क ने दुनिया के सबसे मूल्यवान कार निर्माता को पूर्ण पैमाने पर भारत में वाहन लॉन्च करने से रोक दिया है। इतना ही नहीं अगर वाहन की कीमत 40,000 डॉलर से अधिक है, तो सरकार ऐसे वाहनों पर 100% आयात शुल्क भी लेती है। दिलचस्प बात यह है कि Tesla ने अपने लिए 1 फरवरी की समय सीमा तय की थी, जब भारत ने अगले साल के लिए अपना केंद्रीय बजट पेश किया। Tesla यह देखना चाहती थी कि क्या उसने जो लॉबिंग की है, उसके परिणामस्वरूप कोई बदलाव आया है या नहीं। हालांकि, सरकार नहीं हिली और यूएस-आधारित कार निर्माता ने अपनी योजनाओं को रोक दिया।

कई कंपनियां कर चुकी भारत से एग्जिट

Tesla नई दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख भारतीय शहरों में शोरूम और सर्विस सेंटर खोलने के लिए रियल एस्टेट विकल्पों की तलाश कर रही थी, लेकिन वह योजना भी अब होल्ड पर है। भारत ने आयात करों से बचने के लिए Tesla को बार-बार भारत में निर्माण करने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन Tesla देश में निवेश करने को तैयार नहीं है। हालांकि, इसके प्रतिद्वंद्वी मर्सिडीज-बेंज ने टैक्स कम ना होने पर इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, और भारत में अपने इलेक्ट्रिक वाहन को असेंबल करना शुरू कर दिया है। देश में लगने वाले इस आयातित शुल्क के चलते अमेरिकी कार निर्माता फोर्ड ने वैश्विक बाजारों के लिए भारत में इलेक्ट्रिक वाहन बनाने की अपनी योजना भी रोक दी है। गुरुवार को अमेरिकी कार निर्माता फोर्ड के भारतीय प्रबंधन ने चेन्नई संयंत्र में कर्मचारियों को इसकी सूचना दी। बताते चलें, कि फोर्ड इंडिया उन 20 अलग-अलग कंपनियों में शामिल थी, जिन्हें फरवरी 2022 में घोषित भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम के तहत चुना गया था। लेकिन वह अब अपना आवेदन वापस लेने की योजना में है, क्योंकि वह अब देश में निवेश नहीं करेगी।

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